
आँवला खाने से आयु बढ़ती है। इसका रस पीने से धर्म का संचय होता है और रस को शरीर पर लगाकर स्नान करने से दरिद्रता दूर होकर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं। मृत व्यक्ति की हड्डियाँ आँवले के रस से धोकर किसी नदी में प्रवाहित करने से उसकी सदगति होती है। (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, का.मा. 12.75)
इसे भी पढ़ें :- प्रमुख हिंदू देवी देवता – 33 कोटि या 33 करोड़ एक रहस्य
प्रत्येक रविवार, विशेषतः सप्तमी को आँवले का फल त्याग देना चाहिए। शुक्रवार, प्रतिपदा, षष्ठी, नवमी, अमावस्या और सक्रान्ति को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए। आँवला-सेवन के बाद 2 घंटे तक दूध नहीं पीना चाहिए।
तुलसी
गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनशक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है। तुलसी की माला पर भगवन्नाम-जप करना कल्याणकारी है। मृत्यु के समय मृतक के मुख में तुलसी के पत्तों का जल डालने से वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के लोक में जाता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंडः 21.42)
इसे भी पढ़ें :- इन आयुर्वेदिक उपाय द्वारा पाए मनचाही खूबसूरती
तुलसी के पत्ते सूर्योदय के पश्चात ही तोड़ें। दूध में तुलसी के पत्ते नहीं डालने चाहिए तथा दूध के साथ खाने भी नहीं चाहिए। घर की किसी भी दिशा में तुलसी का पौधा लगाना शुभ व आरोग्यरक्षक है। पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी और सूर्य-सक्रान्ति के दिन, मध्याह्नकाल, रात्रि, दोनों संध्याओं के समय और अशौच के समय, तेल लगा के, नहाये
धोये बिना जो मनुष्य तुलसी का पत्ता तोड़ता है, वह मानो भगवान श्रीहरि का मस्तक छेदन करता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंडः 21.50.51) रोज सुबह खाली पेट तुलसी के पाँच-सात पत्ते खूब चबाकर खायें और ऊपर से ताँबे के बर्तन में रात का रखा एक गिलास पानी पियें। इस प्रयोग से बहुत लाभ होता है। यह ध्यान रखें कि तुलसी के पत्तों के कण दाँतों के बीच न रह जायें। बासी फूल और बासी जल पूजा के लिए वर्जित है परंतु तुलसी दल और गंगाजल बासी होने पर भी वर्जित नहीं है। (स्कंद पुराण, वै.खंड, मा.मा. 8.9) फ्रेंच डॉक्टर विक्टर रेसीन ने कहा हैः 'तुलसी एक अद्भुत औषधि है, जो ब्लडप्रेशर व पाचनतंत्र के नियमन, रक्तकणों की वृद्धि एवं मानसिक रोगों में अत्यन्त लाभकारी है। मलेरिया तथा अन्य प्रकार के बुखारों में तुलसी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है।' तुलसी ब्रह्मचर्य की रक्षा में एवं यादशक्ति बढ़ाने में भी अनुपम सहायता करती है। तुलसी बीज का लगभग एक ग्राम चूर्ण रात को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट लेने से वीर्यरक्षण में बहुत-बहुत मदद मिलती है।
इसे भी पढ़ें :- संतान प्राप्ति के ऐसे उपाय जो निरर्थक नहीं अचूक है सदियों से
पीपल : जो मनुष्य पीपल के वृक्ष को देखकर प्रणाम करता है, उसकी आयु बढ़ती है तथा जो इसके नीचे बैठकर धर्म-कर्म करता है, उसका कार्य पूर्ण हो जाता है। जो मूर्ख मनुष्य पीपल के वृक्ष को काटता है, उसे इससे होने वाले पाप से छूटने का कोई उपाय नहीं है। (पद्म पुराण, खंड 7, अ.12)
'ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई व ग्रहदोषों का प्रभाव शांत होता है। घर में पीपल का वृक्ष होना उचित नहीं है परंतु खुली जगह में पश्चिम दिशा में पीपल संपत्तिकारक है।
इसे भी पढ़ें :- यौन शक्ति बढ़ाने के सरल और अचूक आयुर्वेदिक उपाय
बेल (बिल्व)
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार और द्वादशी के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। जिस स्थान में बिल्ववृक्षों का घना वन है, वह स्थान काशी के समान पवित्र है। बिल्वपत्र छः मास तक बासी नहीं माना जाता। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रान्ति और सोमवार को तथा दोपहर के बाद बिल्वपत्र न तोड़ें।40 दिन तक बिल्ववृक्ष के सात पत्ते प्रतिदिन खाकर थोड़ा पानी पीने से स्वप्न दोष की बीमारी से छुटकारा मिलता है। घर के आँगन में बिल्ववृक्ष लगाने से घर पापनाशक और यशस्वी होता है। बेल का वृक्ष उत्तर-पश्चिम में हो तो यश बढ़ता है, उत्तर-दक्षिण में हो तो सुख शांति बढ़ती है और बीच में हो तो मधुर जीवन बनता है।
यह भी पढ़े :
नौकरी पाने के लिए रामबाण उपाय | Naukri Pane ke liye ramban upay
धूम्रपान / सिगरेट , तम्बाकू छुड़ाने के उपाय dhumrpan chudane ke upay
भूख की कमी का आयुर्वेदिक उपचार
उदर की पीड़ा का आयुर्वेदिक उपचार
पथरी का आयुर्वेदिक इलाज
खून की कमी के लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय
दस चमत्कारिक पत्तियां वैदिक ऋषियों और, मीठी नीम का पत्ता, औषधीय गुणों से परिपूर्ण , बेल के पत्तों, श्वेत कुष्ट नाशक बावची के पते अमर बेल, श्वेत कुष्ट नाशक बावची के पते, अमर बेल, धतछरे क पते, नीम के पते, बकायन के पते, सत्यानासी के पते,आँवलासार गंधक, लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप और बकरी का शुद्ध दूध, गिलोय और गेहूं के ज्वारे का रस तुलसी और नीम, नीम और तुलसी के 5-5 पत्तों के साथ बेल की 5 पत्तियों, प्रतिदिन खाने से कैंसर में लाभ, आंवला है भरपूर गुणों वाला एक आयुर्वेदिक फल, गिलोय Giloy है चमत्कारी औष्धिय गुणों से भरपूर, गिलोय Giloy है चमत्कारी औष्धिय गुणों से भरपूर, मधुमेह का काल हार्ट अटैक में भी लाभदायक,
चमत्कारी सस्ता घरेलू उपाय, Neem is deteriorated just gradually,, नीम की कडवी चाय के मीठे फायदे, आंवला के फायदे, गुण, लाभ, नुकसान, amla-ke-fayde-gun-labh-nuksan-in-hindi, फल कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस , पोटेशियम , जिंक , कैरोटीन, प्रोटीन , विटामिन ए , ई और बी कॉम्प्लेक्स , फोलेट , सोडियम, संतृप्त वसा, फाइबर आहार, Chamatkari Guno Wale Bel Patthar ke Fayde, भारत में पुरातन काल से ही तुलसी के औषधीय गुणों, गाजर को खास गुणों से भरपूर, शक्तिशाली बेल के पत्ते जिससे बीमारियां भी, Amazing Health Benefits, घरेलू उपचार आयुर्वेदिक उपाय,
0 Comments